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अगले वर्ष महर्षि विश्वामित्र की धरती बक्सर को मिलेगी अलग पहचान

(बक्सर ऑनलाइन न्यूज):- महर्षि विश्वामित्र की तपो भूमि कहे जाने वाले बक्सर जिले को अगले वर्ष एक नई पहचान मिलेगी। जिले का डुमरांव क्षेत्र गायों की देसी नस्लों को सहेजने का केंद्र बनाया जा रहा हैं। केन्द्र प्रायोजित योजना गोकुल मिशन के अन्तर्गत सूबे के इकलौते गोकुल ग्राम का निर्माण कार्य डुमराँव में तेजी से जारी है और अगले साल के आखिर तक इसके पूरा होने की मियाद तय है। लगभग 18 करोड़ की इस परियोजना में आधारभूत ढांचा के लिए 8 करोड़ रुपये से काम अभी जारी है।

गोकुल ग्राम का निर्माण हरियाणा फॉर्म की लगभग 70 एकड़ भूमि पर कराया जा रहा है। परियोजना के पूरा होने पर यहां श्वेत क्रांति के अलावा हरित क्रांति की शुरुआत होना तय है। योजना के निर्माण कार्य के दरम्यान प्रथम फेज में चारदीवारी सहित देशी गायों के पालन-पोषण को लेकर शेड का निर्माण कार्य चल रहा है।

इस सम्बंध में जानकारी देते हुए एसडीएम हरेन्द्र राम ने बताया कि केन्द्र प्रायोजित योजना गोकुल ग्राम सूबे की इकलौती योजना है। गोकुल ग्राम की स्थापना के बाद से डुमरांव में देसी गाय का दूध एवं घी आसानी से सस्ते दर पर उपलब्ध होगा। अनुमंडलाधिकारी ने बताया कि गोकुल ग्राम में कुल 500 देसी गायों के पालन-पोषण का लक्ष्य है। लेकिन, प्रथम फेज में 250 देशी गायों की खरीद की जाएगी।

डुमरांव स्थित हरियाणा फॉर्म के प्रबंधक डॉ.फतेह ने बताया कि गोकुल ग्राम का निर्माण कार्य को लेकर आवंटित जमीन पर अस्थाई तौर पर लगाए गए दुकानों को हटाए जाने को लेकर अनुमंडलाधिकारीको पत्र भेजा जा चुका है,वही जिला पशुपालन पदाधिकारी कृष्ण कुमार कृष्ण बताते हैं कि राष्ट्रीय पशु आनुवांशिक संसाधन ब्यूरो में इस पर लगातार अनुसंधान हो रहा है. वही गोकुल ग्राम प्रोजेक्ट के निदेशक डॉ.डी.के. ठाकुर ने बताया कि गोकुल ग्राम में गोबर गैस और दुग्ध प्लांट भी लगाए जाएंगे।
आपको बता दें की इसी साल 9 मार्च को केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्य कल्याण मंत्री सह स्थानीय सांसद अश्विनी कुमार चौबे ने निर्माण कार्य का शुभारंभ किया गया था जिस पर तेजी से कार्य शुरू कर दिया गया हैं।