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लॉकडाउन का बुरा असर,पशुचारा की हुई भारी किल्लत, किसानों की बढ़ी मुश्किलें

By- गुलशन सिंह

(बक्सर ऑनलाइन न्यूज़):- कोविड-19 के बढ़ते प्रकोप के कारण हुए लॉकडॉउन के चलते जिले के सिमरी प्रखंड के बलिहार,दुल्लहपुर, बड़कागाँव, नगरपुरा, खन्धहरा सहित दर्जनों ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों पर बुरा असर पड़ना शुरू हो गया हैं। दरअसल, लॉकडाउन में कई गाँवो के अंदर पशु चारा का समस्या उत्पन्न हो गयी है। पशु चारा के कमी के कारण मवेशी पालको को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

इस सम्बंध में मवेशी पालक सिपाही यादव, सुदर्शन यादव,भगवान सिंह,बबलू सिंह,लालू खरवार,संजय यादव आदि किसानों ने बताया कि सरकार ने खाने-पीने के सामानों का दाम तय करवा दिया, लेकिन पशु चारा के दाम पर कोई लगाम नहीं लगा है और नाही इसकी व्यवस्था कराई जा रही हैं। वही पशुपालकों का कहना है कि भूसा की गाड़ी गांव में आ ही नही रही हैं. कुछ भूसा व्यापारियों को फोन किया जा रहा है तो उनका कहना है कि लॉकडाउन में पुलिस ड्राइवर और मजदूरों को लाठी डंडे से मार रही हैं जिसके वजह से कोई भी मजदूर घर छोड़ कर नही जा रहा हैं।

मवेशी पालकों की माने तो व्यापारी और दुकानदार लॉकडाउन का नाजायज फायदा उठाते हुए मनमाने दाम पर पशु चारा बेच रहे हैं। मवेशी पालकों ने बताया कि बिचाली 13 रुपए, कुट्टी 15 रुपए, चोकर 25 रुपए, सुधा दाना अमृत 24 रूपए प्रतिकिलो की दर पर बेचा जा रहा है जो काफी महंगा है। मवेशी पालकों ने खाने-पीने के सामानों की तरह हर दुकान में रेट चार्ट लगाने की मांग स्थानीय प्रशासन से की है ताकि उचित दाम पर मवेशी पालकों को पशु चारा मिल सके। ऐसे में बड़ा सवाल प्रशासन के ऊपर उठ रहा है कि आखिर भूसा एवं पशुचारा की गाड़ियों को क्यो रोका जा रहा हैं? जब भूसा की गाड़ियां गाँवो तक पहुचेंगी ही नही तो जाहिर सी बात है कि पशुचारा का किल्लत क्षेत्रों में होगा और इसका पूरा पूरा जिम्मेवार जिला प्रशासन हैं जो पशुचारा के गाडियों को रोक कर इस तरह की समस्याओं को बढ़ावा दे रहा है।