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स्मार्टफोन छीन रहा मासूमों का जीवन,माता-पिता है सबसे बड़ा दोषी

By- अमित ओझा की विशेष विचार

(बक्सर ऑनलाइन न्यूज):- आज की फोरजी दुनिया में लोग स्मार्ट बनने के लिए अपने तो स्मार्टमोबाइल का उपयोग तो करते ही है साथ में अपने बच्चे को भी स्मार्ट फोन थमा देते है जबकि उनक बच्चा उस योग्य नही होता है , जो बच्चा अभी चलने का योग्य नही है अगर उसे खाना खिलाना पड़ता है तो माता -पिता उस नन्हे से जान के सामने स्मार्ट फोन पर छोटा भीम ,कार्टून ,डांस जैसी मनोरंजन दृश्य को पेश कर देते है ,जिसको देखकर बच्चा कुछ भी खा लेता है जो एक दिन नही बल्कि ऐसे ही कुछ दृश्य उसे आजीवन चाहिए अभी हाल ही में ग्रेटर नोएडा में एक 16 वर्षीय लड़के ने अपनी माँ और बहन की हत्या कर दी क्योंकि बहन ने शिकायत कर दी थी कि भाई दिन भर मोबाइल फोन पर खतरनाक गेम खेलता रहता है और इसलिए माँ ने बेटे की पिटाई की, उसे डाँटा और उसका मोबाइल फोन ले लिया। मोबाइल पर मारधाड़ वाले गेम खेलते रहने के आदी लड़के का गुस्सा इससे बढ़ गया और उसने अपनी माँ और बहन की हत्या कर दी और घर से भाग गया,परन्तु सवाल और जबाब यहा तक ही समाप्त नही होता है इस घटना के बाद एक बार फिर सवाल उठा है कि बच्चों को किस उम्र में मोबाइल फोन दिया जाना चाहिए। मनोचिकित्सकों का भी कहना है कि बच्चों को जितना हो सके स्मार्टफोन से दूर रखना चाहिए। दरअसल होता यह है कि पहले माता-पिता ही लाड़-प्यार में बच्चों को स्मार्टफोन या टैबलेट अथवा आईपैड आदि दे देते हैं और फिर बाद में उसके दुष्परिणाम भुगतते हैं। आइए जानते हैं क्या हैं स्मार्टफोन से होने वाले नुकसान और बच्चों को अगर स्मार्टफोन की लत लग गयी है।

स्मार्टफोन या टैबलेट से होने वाले नुकसान

-सबसे बड़ा नुकसान तो यह होता है कि बच्चे पूरी तरह स्मार्टफोन पर निर्भर हो जाते हैं। यदि बच्चा स्मार्टफोन का उपयोग अपनी पढ़ाई के लिए भी कर रहा है तो भी नुकसान हो रहा है। जिस उत्तर को खोजने के लिए उसे पुस्तक का पाठ पढ़ना चाहिए या फिर जिस शब्द का अर्थ जानने के लिए डिक्शनरी के पन्नों को पलटना चाहिए वह काम उसका झट से गूगल पर हो जाता है इसलिए बच्चों ने पुस्तकों को पढ़ना कम कर दिया है।स्मरण शक्ति को भी पहुँचता है नुकसान। पहले लोग एक दूसरे का फोन नंबर बड़ी आसानी से याद कर लेते थे, कोई घटजोड़ करना हो तो वह भी झट से उंगलियों पर कर लिया करते थे। यही नहीं लोगों के जन्मदिन या सालगिरह इत्यादि भी आसानी से याद रहती थीं लेकिन अब सब कुछ स्मार्टफोन करता है और बच्चों को अपना दिमाग लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। पर्याप्त नींद नहीं लेने से होता है नुकसान। बच्चों को पर्याप्त नींद लेना जरूरी है लेकिन स्मार्टफोन की लत लग जाये तो बच्चे माता-पिता से छिप कर रात को स्मार्टफोन पर गेम खेलते रहते हैं या फिर कोई मूवी आदि देखते हैं जिससे उनके सोने के समय में तो कटौती होती ही है साथ ही लगातार स्मार्टफोन से चिपके रहने से आंखों को भी नुकसान होता है।उम्र से पहले ही पता लग जाता है सब कुछ। स्मार्टफोन में आप तरह तरह के एप डाउनलोड कर सकते हैं साथ ही यूट्यूब पर जो भी वीडियो चाहे देख सकते हैं और इंटरनेट पर हर तरह की सामग्री उपलब्ध है। ऐसे में बच्चों को जो चीजें एक उम्र में जाननी चाहिए वह उन्हें कम उम्र में ही पता लगने लगती हैं जिसका उनके दिमाग पर असर होता है। हाल ही में दिल्ली में एक खबर आई कि एक पांच साल के लड़के ने अपनी हमउम्र लड़की से बलात्कार किया। इस घटना के पीछे भी यही माना गया कि संभवतः मोबाइल फोन पर कोई क्लिप आदि देख कर वह लड़का प्रेरित हुआ होगा। इस पद्धति में सबसे ज्यादा उतेजना के कारण लड़का गलत कदम उठा लेता है जिसका जिम्वेदार लड़का नही बल्कि उसके माता दृपिता होते है हिंसक भी हो जाते हैं या अवसाद में चले जाते हैं। कई ऐसी भी घटनाएं सामने आई हैं कि किसी कारण से बच्चा खुद को अकेला महसूस करता है और ऐसे किसी सोशल फोरम को ज्वॉइन कर लेता है जहां उसे अपनापन लगता है तो उसका गलत फायदा उठा लिया जाता है। ब्लू व्हेल गेम ,पॉपजी, फोर्टनाईट इसका सशक्त उदाहरण है जिसे खेलने वाले को खुद ही मौत को गले लगाना होता है। इसके अलावा बहुत से ऐसे गेम हैं जोकि हिंसक हैं और इसे लगातार खेलते रहने से स्वभाव हिंसक हो जाता है।

क्या कहते है डॉ राजेश कुमार..
इस सम्बन्ध में डॉ राकेश कुमार ने बताया की कम उम्र के बच्चो को तो स्मार्ट फोन देना ही नही चाहिए ,मोबाईल से जो रेडिएसन निकलती है ,इससे पाचन शक्ति कमजोर और नीद भी कम आने लगती है जो एक बड़ी बिमारी का रूप ले लेती है।

इस पर मनोविज्ञानिको का कहना है की इसको लेकर यूनिवर्सिटी ऑफ केलिफोर्निया के एक शोध के अनुसार मोबाइल को वाइब्रेशन मोड पर ज्यादा देर तक इस्तेमाल करने से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए मोबाइल को साइलेंट या फिर वाइब्रेशन में करके तकिये के निचे रखकर नही सोना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि मोबाइल से जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन निकलती है, वह दिमाग की कोशिकाओं को वृद्धि करने में प्रभावित करती है जिससे ट्यूमर विकसित हो सकता है. युवाओं के सर को 25 प्रतिशत 10से 5 साल तक के बच्चों के सर को 50 प्रतिशत और 5 साल के कम उम्र के बच्चों को 75 प्रतिशत तक प्रभावित करता है।