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हिन्दी व भोजपुरी भाषा के प्रसिद्ध कवि मुकेश ओझा ने डॉ ए. पी.जे अब्दुल कलाम के जयंती पर व्यक्त की अपनी विचार,अवश्य पढें…

मैं मुकेश कुमार ओझा एक कवि हूँ आज मैं उस विद्वान की जयंती पर अपना विचार इस बक्सर ऑनलाइन न्यूज के माध्यम से आप सबके बीच रख रहा हूँ जिन्होंने एक गरीब परिवार के साधारण बच्चे होते हुए भी ऐसी ऐसी असाधरण कार्य कर दी जिसके बदौलत दुनिया भर में हिंदुस्तान का नाम रौशन हुआ हैं। हम बात कर रहे हैं भारत के ‘मिसाइल मैन’ के रूप में सुविख्यात डॉ. ए.पी.जे अब्दुल कलाम की।

आज के दिन उनकी जयंती है ,इस मौके पर कृतज्ञ राष्ट्र उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर रहा है। वे बेहद साधारण पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते थे और जमीन और जड़ों से जुड़े रहकर उन्होंने ‘जनता के राष्ट्रपति’ के रूप में लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बनाई थी. समाज के सभी वर्गो और विशेषकर युवाओं के बीच प्रेरणा स्रोत बने डॉ. कलाम ने राष्ट्राध्यक्ष रहते हुए राष्ट्रपति भवन के दरवाजे आम जन के लिए खोल दिए जहां बच्चे उनके विशेष अतिथि होते थे |एक सच्चे मुसलमान और एक नाविक के बेटे एवुल पाकिर जैनुलाबद्दीन अब्दुल कलाम ने 18 जुलाई 2002 को देश के 11वें राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभाला और उन्हें एक ऐसी हस्ती के रूप में देखा गया जो कुछ ही महीनों पहले गुजरात के सांप्रदायिक दंगों के घावों को कुछ हद तक भरने में मदद कर सकते थे | देश के पहले कुंवारे राष्ट्रपति कलाम का हेयर स्टाइल अपने आप में अनोखा था और एक राष्ट्रपति की आम भारतीय की परिभाषा में फिट नहीं बैठता था लेकिन देश के वह सर्वाधिक सम्मानित व्यक्तियों में से एक थे जिन्होंने एक वैज्ञानिक और एक राष्ट्रपति के रूप में अपना अतुल्य योगदान देकर देश सेवा की |अत्याधुनिक रक्षा तकनीक की भारत की चाह के पीछे एक मजबूत ताकत बनकर उसे साकार करने का श्रेय डॉ. कलाम को जाता है और देश के उपग्रह कार्यक्रम , निर्देशित और बैलेस्टिक मिसाइल परियोजना , परमाणु हथियार और हल्के लड़ाकू विमान परियोजना में उनके योगदान ने उनके नाम को हर भारतीय की जुबां पर ला दिया |
पन्द्रह अक्तूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में पैदा हुए कलाम ने मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी से स्नातक करने के बाद भौतिकी और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग का अध्ययन किया और फिर उसके बाद रक्षा शोध एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) से जुड़ गए. रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में शोध पर ध्यान केंद्रित करने वाले डा. कलाम बाद में भारत के मिसाइल कार्यक्रम से जुड़ गए. बैलेस्टिक मिसाइल और प्रक्षेपण वाहन तकनीक में उनके योगदान ने उन्हें ‘‘भारत के मिसाइल मैन’’ का दर्जा दिया |
भारत रत्न समेत कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किए गए कलाम ने 1998 में भारत द्वारा पोखरण में किए गए परमाणु हथियार परीक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की. उस समय वाजपेयी सरकार केंद्र की कमान संभाल रही थी. शाकाहारी कलाम के बारे में एक बार कहा गया था कि उन्होंने भारत में कई तकनीकी पहलुओं को आगे बढ़ाया और उसी प्रकार वह खुद भी ‘‘मेड इन इंडिया’’ थे जिन्होंने कभी विदेशी प्रशिक्षण हासिल नहीं किया |
डॉ कलाम ने के आर नारायणन से राष्ट्रपति पद की कमान संभाली थी और वह 2002 से 2007 तक इस पद पर रहे. वे देश के सर्वाधिक लोकप्रिय राष्ट्रपति रहे | राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में उनका मुकाबला भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की क्रांतिकारी नेता लक्ष्मी सहगल के साथ था और वह इस एकपक्षीय मुकाबले में विजयी रहे |उन्हें राष्ट्रपति पद के चुनाव में सभी राजनीतिक दलों का समर्थन हासिल हुआ था |राष्ट्रपति पद पर आसीन होने के साथ ही वह राष्ट्रपति भवन के सम्मान को नई ऊंचाइयां देने वाले पहले वैज्ञानिक बन गए बतौर राष्ट्रपति अपने कार्यकाल में कलाम को 21 दया याचिकाओं में से 20 के संबंध में कोई फैसला नहीं करने को लेकर आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा। डॉ कलाम ने अपने पांच साल के कार्यकाल में केवल एक दया याचिका पर कार्रवाई की और बलात्कारी धनंजय चटर्जी की याचिका को नामंजूर कर दिया जिसे बाद में फांसी दी गई थी। ऐसे महान पुरूष की जयंती पर उन्हें शत शत नमन करता हूँ।